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हाल की खोजें: पत्थर
कुल 37 परिणाम मिले कीवर्ड: पत्थर

नन्ही चिड़िया और विशाल पर्वत

एक विशाल पर्वत की चोटी पर एक बहुत बड़ा पत्थर गिरने वाला था, जिससे नीचे बसा पूरा गाँव खतरे में था। सभी बड़े जानवर और पक्षी डरकर भाग गए, लेकिन एक नन्ही सी चिड़िया ने उस भारी संकट को टालने का बीड़ा उठाया। उसने अपनी चोंच में पानी की एक-एक बूंद भरकर पर्वत की दरारों में डालनी शुरू की ताकि कड़ाके की ठंड में पानी जमकर चट्टान को रोक सके। बाकी सब उसका मजाक उड़ा रहे थे कि इतनी छोटी सी कोशिश से क्या होगा। लेकिन चिड़िया बिना रुके लगातार जुटी रही। उसकी इस अदम्य निष्ठा और निरंतर प्रयास को देखकर मौसम ने भी साथ दिया और पानी बर्फ बनकर दरार में जम गया, जिससे पत्थर का खिसकना रुक गया। छोटी सी चिड़िया ने साबित कर दिया कि यदि हौसला बुलंद हो, तो छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

नदी की सच्ची धारा

हिमालय की ऊँची वादियों से निकलकर एक युवा नदी बड़ी तेजी से बहती हुई आगे बढ़ रही थी। नदी को अपने वेग और सुंदरता पर बहुत अधिक घमंड था कि वह हर रास्ते को अपनी ताकत से चीरकर आगे निकल सकती है। रास्ते में एक बहुत बड़ा और प्राचीन पत्थर आया जो नदी के बहाव को रोकने की कोशिश कर रहा था। नदी ने गुस्से में आकर अपनी पूरी ताकत उस पत्थर पर लगा दी ताकि उसे अपने रास्ते से पूरी तरह हटा सके। लेकिन जितना अधिक वह जोर लगाती, पत्थर अपनी जगह से टस से मस नहीं होता था और नदी का पानी बिखर जाता था। तभी उस पत्थर ने नदी से बहुत ही शांत स्वर में कहा कि हे बहने वाली धारा, केवल विरोध करने से कभी रास्ते नहीं बनते बल्कि अपनी दिशा को थोड़ा बदलकर आगे बढ़ना ही बुद्धिमत्ता है। नदी को उसकी बात समझ आ गई और उसने जिद छोड़कर अपनी धारा को थोड़ा मोड़ा और सहजता से आगे बढ़ गई। आगे जाकर वही नदी एक विशाल सागर में मिल गई और उसने पाया कि लचीलापन और समझदारी ही सबसे बड़ी शक्ति होती है। इस प्रकार नदी ने अपने जीवन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सबक सीख लिया जो हर इंसान के जीवन के लिए आवश्यक है।

लालच का अंतिम् परिणाम

एक छोटे से गाँव में सोहन नाम का एक गरीब किसान रहता था। वह अपनी मेहनत से जो भी कमाता था, उससे संतुष्ट रहता था। एक दिन उसे खेत में काम करते समय एक चमकीला पत्थर मिला, जो कोई साधारण पत्थर नहीं बल्कि एक जादुई मणिका था। सोहन उस मणिका को पाकर बहुत अमीर बनने के सपने देखने लगा। उसने दूसरों की मदद करना छोड़ दिया और सिर्फ और सिर्फ धन जमा करने की धुन में लग गया। धीरे-धीरे उसका स्वभाव पूरी तरह बदल गया और वह अपनों से भी दूर हो गया। एक दिन वह मणिका अचानक गायब हो गई और सोहन के पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचा। उसे समझ आ गया कि जो लोग लालच के रास्ते पर चलते हैं, वे अंत में सब कुछ खो देते हैं।

पत्थर की लकीर

हमारी जुबान और हमारे उसूल पत्थर की लकीर हैं,
बदलते वक्त के साथ हम अपने इरादे नहीं बदलते।
जो एक बार दिल से उतर गया,
फिर वो हमारी नजरों में दोबारा नहीं चढ़ता।

साहس का दामन

मुश्किलें तो राहों में पत्थर बनकर आती हैं, पर मजबूत इरादों से वो खुद ही छंट जाती हैं। साहस की एक किरण से रास्ता मिल जाता है, अंधेरे में भी नया सवेरा खिल जाता है।

पसीने की स्याही

किस्मत के भरोसे बैठने वाले हाथ मलते रह जाते हैं, पसीने की स्याही से अपनी तकदीर खुद बनाते हैं। जो राहों के पत्थरों को सीना चीरकर आगे बढ़ते हैं, वही असली मुकाम को पाते हैं।

मेहनत की धार

किस्मत के भरोसे बैठने वाले सिर्फ हाथ मलते हैं,और मेहनत करने वाले अपनी किस्मत खुद बदलते हैं।पत्थरों को चीर कर जो राह बनाते हैं,वही असली मुसाफिर कहलाते हैं।