मेहनत की धार

मेहनत की धार

“
किस्मत के भरोसे बैठने वाले सिर्फ हाथ मलते हैं,और मेहनत करने वाले अपनी किस्मत खुद बदलते हैं।पत्थरों को चीर कर जो राह बनाते हैं,वही असली मुसाफिर कहलाते हैं।
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किस्मत के भरोसे जो बैठे रहते हैं, उनके हाथ हमेशा खाली ही रहते हैं। मेहनत का दीप जलाओ अपने हाथों से, अंधेरे भी खुद-ब-खुद रास्ता देते हैं।