कर्म पथ के मुसाफिर
किस्मत के भरोसे बैठना छोड़ दे बंदे,
तू अपने हाथों की लकीरों को खुद गढ़,
पसीना बहेगा तभी चमक आएगी चेहरे पर,
कर्म ही तेरी असली पहचान बनेगा कल।
तू अपने हाथों की लकीरों को खुद गढ़,
पसीना बहेगा तभी चमक आएगी चेहरे पर,
कर्म ही तेरी असली पहचान बनेगा कल।
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