मेहनत की खुशबू
पन्नों पर बिखरी स्याही और माथे का पसीना, यही है इंसान की असली और सच्ची पूंजी। जो इन दोनों को अपना हथियार बना ले, उसके लिए दुनिया में कुछ भी नहीं है दूजी।
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