#लघु कथाएँ
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मिट्टी के खिलौने
“
सूरज की पहली किरण के साथ ही मदन अपनी छोटी सी दुकान के बाहर बैठकर मिट्टी के खिलौने बनाने बैठ जाता था। उसके हाथों का जादू ऐसा था कि बेजान मिट्टी भी सुंदर घोड़ों, हाथियों और पक्षियों का रूप ले लेती थी। शहर के बड़े बाजारों में प्लास्टिक और चीनी मिट्टी के चमकते खिलौने बिकते थे, जिससे मदन की दुकान पर ग्राहक कम ही आते थे। एक दिन एक मशहूर चित्रकार उसकी दुकान पर आया। उसने मदन की कला को देखा और उसकी सादगी का कायल हो गया। चित्रकार ने न केवल उसके सारे खिलौने खरीदे, बल्कि शहर की एक बड़ी कला प्रदर्शनी में मदन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। मदन की वर्षों की मेहनत और उसकी कला को आखिरकार वह पहचान मिल ही गई जिसकी उसे तलाश थी।
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