ओस की बूंद

ओस की बूंद

“
पत्तियों पर बैठी ओस की यह बूंद,
कह रही है प्रकृति का नया रूप।
सुबह की ठंडी हवा का झोंका,
भर रहा है मन में अनोखा रूप।
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