बदलते रिश्ते

बदलते रिश्ते

“
वक़्त के साथ लोग यहाँ बदल जाते हैं,अपने ही अपनों से हाथ मल जाते हैं।
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सन्नाटे की गूंज

रात के सन्नाटे में खुद से बात करते हैं, तेरी यादों के दीये रोज रात जलाते हैं। मिल न सके जो सफर में कभी उम्र भर को, उन्हीं को हम दिल की गहराइयों में चाहते हैं।