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कुल 6 परिणाम मिले कीवर्ड: भूतिया हवेली

रेलवे स्टेशन का आखिरी मुसाफिर

रात के दो बज चुके थे और मानसिंह अपनी आखिरी ट्रेन का इंतजार वीरान प्लेटफॉर्म पर कर रहा था। स्टेशन पर उसके अलावा कोई टिकट कलेक्टर भी नजर नहीं आ रहा था। तभी पटरियों पर लोहे की रगड़ खाने की भयानक आवाज गूंजी और एक पुरानी भाप इंजन वाली ट्रेन आकर रुक गई। डिब्बों की खिड़कियों से कोई रोशनी नहीं आ रही थी। जिज्ञासावश मानसिंह ने एक डिब्बे का दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा। अचानक ट्रेन तेजी से चल पड़ी और अंदर बैठे सभी यात्री बिना चेहरे के काले साये निकले। उन्होंने मानसिंह को घेर लिया। सुबह जब पैसेंजर ट्रेन आई, तो मानसिंह उस पटरी से कई मील दूर बेहोश मिला, और उसके हाथ में उसी पुरानी ट्रेन का एक जंग लगा टिकट था।

पुरानी हवेली की परछाइयां

गांव के छोर पर बनी खंडहर नुमा हवेली में जाने की हिम्मत कोई नहीं करता था, लेकिन कबीर ने एक शर्त के तहत वहां जाने का फैसला किया। उसने हाथ में टॉर्च ली और लकड़ी के चरमराते दरवाजे को धक्का देकर अंदर कदम रखा। अंदर कदम रखते ही उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे सैकड़ों आंखें एक साथ उसी को घूर रही हों। उसने टॉर्च की रोशनी दीवारों पर डाली, जहाँ पुरानी तस्वीरें टंगी थीं और हर तस्वीर की आंखें उसकी तरफ घूम रही थीं। अचानक एक भारी आवाज गूंजी कि यहाँ से कभी कोई वापस नहीं गया, और दरवाजा अपने आप बंद हो गया।

रेगिस्तान की सुनसान हवेली

राजस्थान के एक वीरान इलाके में बने पुराने किलेनुमा मकान में सोहन ने एक रात बिताने का फैसला किया। चारों तरफ सिर्फ रेत और खामोश रात का अंधेरा था। जब रात के दो बजे, तो अचानक भारी दरवाजों के अपने आप खुलने और बंद होने की आवाजें आने लगीं। सोहन ने टॉर्च जलाकर देखा, तो दीवार पर लटकी पुरानी पेंटिंग में बने राजा की आंखें जीवित हो उठी थीं और वह उसे घूर रहा था। कमरे का तापमान अचानक शून्य से नीचे गिर गया और पैरों तले रेत खिसकने लगी। वह किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागा, लेकिन पीछे से गूंजती हंसी आज भी उसके कानों में गूंजती है।

रेगिस्तान के बीचों-बीच खड़ी हवेली

सड़कों से भटककर तीन दोस्त रात के समय रेगिस्तान के बीचों-बीच बने एक प्राचीन किले नुमा घर के पास पहुंचे। उन्होंने सोचा कि सुबह तक यहीं आराम किया जाए। घर के अंदर प्राचीन फर्नीचर और जलाई गई मोमबत्तियां देखकर उन्हें हैरानी हुई जैसे कोई उनका ही इंतजार कर रहा हो। तभी भारी लकड़ी का मुख्य दरवाजा अपने आप जोर से बंद हो गया और उसकी कुंडी लग गई। कमरों से अजीब सी फुसफुसाहट और हंसने की आवाजें आने लगीं। जब दोस्तों ने भागने की कोशिश की, तो रेत के टीले के बीच से कई साये उनकी तरफ बढ़ते हुए दिखाई दिए। सुबह होने पर वहां सिर्फ कुछ पुरानी हड्डियां और उनकी गाड़ी का टूटा हुआ पहिया मिला।

पुरानी हवेली और महकती हुई अलमारी

शहर के एक कोने में खड़ी सदियों पुरानी हवेली के जीर्णोद्धार का जिम्मा मयंक को मिला था जो इतिहास और वास्तुकला से प्यार करता था। काम के दौरान उसे हवेली के एक गुप्त कमरे में लकड़ी की पुरानी अलमारी मिली जिस पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी। जब मयंक ने उसे खोला तो अंदर से पुराने खतों का एक बंडल और सूखे गुलाब के फूल मिले जिन पर किसी अनजान जोड़े के प्रेम के किस्से दर्ज थे। उन खतों को पढ़ते-पढ़ते मयंक अतीत की दुनिया में खो गया और उसे महसूस हुआ कि दीवारें भले ही पुरानी हो जाएं लेकिन सच्चा प्रेम कभी नहीं मिटता। उसी शाम हवेली के बगीचे में उसे अहाना मिली जो इस हवेली के इतिहास पर शोध करने आई थी। खतों की उस विरासत ने दोनों को एक ऐसा सूत्र में बांध दिया जहाँ इतिहास और वर्तमान मिलकर एक नई प्रेम गाथा लिखने लगे।

पुरानी हवेली की खिड़की

गाँव के छोर पर स्थित वह पुरानी हवेली सदियों पुरानी कहानियों की गवाह थी। कोई वहां जाने की हिम्मत नहीं करता था, सिवाय अक्षित के, जो उस हवेली के जीर्णोद्धार का काम संभाल रहा था। एक दिन काम के दौरान उसे धूल से सनी एक पुरानी डायरी मिली, जिसके पन्नों पर अंजलि नाम की किसी लड़की के खूबसूरत खत लिखे थे। वे खत आज से पचास साल पुराने थे, जो किसी ऐसे शख्स के लिए थे जो कभी उन तक पहुँच ही नहीं पाया। अक्षित उन खतों के शब्दों में इस तरह खो गया कि उसे हवेली से ज्यादा उन भावनाओं की फिक्र होने लगी। तभी एक दिन एक वृद्ध महिला अपनी पोती नैना के साथ उस हवेली को देखने आईं। वह महिला कोई और नहीं बल्कि उसी अंजलि की बेटी थीं, जो अपनी माँ की आखिरी इच्छा पूरी करने आई थीं। नैना और अक्षित जब मिले, तो दोनों को लगा कि वे सदियों से एक-दूसरे को जानते हैं। अतीत के उन पन्नों ने वर्तमान में दो अजनबी दिलों को हमेशा के लिए एक अटूट बंधन में बांध दिया।