अंधेरे में जलती उम्मीद की लौ
रोहित की जिंदगी में जब से उसकी आंखों की रोशनी कम हुई थी, तब तक उसके सारे सपने मानो दम तोड़ चुके थे। वह एक प्रतिभाशाली चित्रकार था और अब कैनवास पर रंग बिखेरना उसके लिए असंभव सा हो गया था। निराशा के इस काले साये में उसकी छोटी बहन नीना ने उसका हाथ थामा और उसे टेक्सचर पेंटिंग की नई दुनिया से परिचित कराया। शुरुआत में रोहित का गुस्सा और हताशा फूट पड़ती थी, लेकिन नीना ने हार नहीं मानी। एक दिन अंधेरे कमरे में उसने रंगों को टटोलकर एक ऐसी अनोखी तस्वीर बनाई जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। उस दिन रोहित को अहसास हुआ कि दृष्टि केवल आंखों से नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों और मजबूत इच्छाशक्ति से होती है।
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