खुशियों की बहार
तुम मिल गए तो ऐसा लगा जैसे सब कुछ मिल गया, पतझड़ के मौसम में जैसे कोई फूल खिल गया। तुम्हारी दोस्ती का यह अनमोल सा असर है, मेरे वीरान दिल में मेला सा लग गया।
0