अंधेरी सुरंग का साया
अमित और उसके दोस्त फोटोग्राफी के शौक में शहर के पास एक पुरानी बंद सुरंग में चले गए। सुरंग के अंदर बहुत अंधेरा था और उनकी मशाल की रोशनी भी मद्धम पड़ने लगी थी। तभी उन्हें अपने पीछे पैरों की भारी आवाज सुनाई दी। उन्होंने मुड़कर टॉर्च की रोशनी डाली, तो वहाँ कोई नहीं था, सिवाय दीवारों पर खून से लिखे उनके अपने नाम के। अमित के दोस्तों ने तुरंत बाहर भागने का फैसला किया, लेकिन सुरंग का मुहाना किसी भारी चट्टान से बंद हो चुका था। अंधेरे के भीतर से एक अजीब सी हँसी गूंज उठी और उनकी टॉर्च एक-एक करके बुझने लगीं।
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