सपने और मेहनत

सपने और मेहनत

“
आंखों में सजाकर ख्वाब बड़े, चल पड़ो तुम अनजाने रास्ते पर। मेहनत की धूप में जो तप गए, वही चमकते हैं मुकद्दर के माथे पर।
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