अडिग चट्टान

अडिग चट्टान

“
हवाओं के रुख से दिशाएं नहीं बदला करतीं,मंजिल पाने वाली आंखें कभी थका नहीं करतीं।जो सीने में आग और आंखों में अंगार रखते हैं,वो आंधियों में भी अपनी चाल नहीं बदला करतीं।
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