सच्ची उड़ान

सच्ची उड़ान

“
परिंदों को मंजिल मिल ही जाती है, जो खुले आसमान में उड़ने का हौसला रखते हैं। जो बैठते हैं दूसरों के सहारे, वे अक्सर जमीन पर ही रह जाते हैं।
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