खुद की पहचान

खुद की पहचान

“
ढूंढता है क्यों तू दुनिया में सहारा,
तुझमें ही छिपा है एक नया नजारा।
पहचान ले अपनी उस छिपी ताकत को,
तू ही है अपनी किस्मत का सितारा।
👁️ 1 बार पढ़ा गया ❤️ लोगों ने पसंद किया

टिप्पणियाँ

अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।

लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।

संबंधित शायरी (Related Shayari)