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समुद्र का संदेश

समुद्र का संदेश

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लहरें जब बार-बार किनारे से आकर टकराती थीं, तो ऐसा लगता था मानो वे रेत को कुछ समझाना चाह रही हों। रमित रोज़ शाम को समुद्र किनारे टहलने जाता और इन लहरों को देखता। उसके जीवन में उथल-पुथल मची हुई थी और वह अपने व्यापार में भारी नुकसान के कारण पूरी तरह टूट चुका था। उसने समुद्र की ओर देखकर सोचा कि यह अंतहीन पानी कभी हार नहीं मानता, फिर वह क्यों इतनी जल्दी घबरा गया। उसने अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेने का फैसला किया और नए सिरे से शुरुआत करने की योजना बनाई। कुछ महीनों की कड़ी मेहनत के बाद उसका व्यवसाय फिर से पटरी पर लौट आया। आज जब वह समुद्र तट पर खड़ा था, तो उसे लहरों का शोर किसी संगीत जैसा मधुर लग रहा था जिसने उसके जीवन को एक नई दिशा दी थी।
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