#नैतिक कहानी
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संतोष का असली खजाना
“
पुरानी हवेली के पास रहने वाला गोपाल हमेशा धनवान बनने के सपने देखता था। उसके पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन और रहने के लिए घर था, फिर भी उसका मन हमेशा अशांत रहता था क्योंकि उसके पास विलासिता की वस्तुएं नहीं थीं। एक रात उसे सपने में एक परी ने एक जादुई थैली दी जिसमें से कभी सोना खत्म नहीं होता था। गोपाल खुशी से पागल हो गया और दिन-रात और अधिक सोना इकट्ठा करने में लग गया। कुछ दिनों बाद उसे अहसास हुआ कि सोने की चिंता में उसकी नींद और चैन दोनों छिन चुके हैं। उसने तुरंत वह थैली वापस लौटा दी और समझ गया कि मन का संतोष ही दुनिया का सबसे बड़ा धन है।
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