#भावनात्मक कहानी
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माँ के हाथ की आखिरी चाय
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नौकरी के सिलसिले में महानगर आए रोहन को हमेशा से अपनी व्यस्त जीवनशैली पर गर्व था। माँ जब भी गांव से फोन करतीं, वह काम का बहाना बनाकर बात टाल देता था। एक दिन अचानक माँ का स्वास्थ्य बिगड़ने का समाचार मिला और वह तुरंत गांव के लिए रवाना हुआ। जब वह घर पहुंचा, तो माँ की सांसें थम चुकी थीं, लेकिन उनके पलंग के पास चायदानी और एक कप गरम चाय रखी थी, जिसे उन्होंने शायद बेटे के आने की आस में बनाया था। उस ठंडी हो चुकी चाय को देखकर रोहन का अहंकार पल भर में चकनाचूर हो गया। उसे समझ आया कि सफलता की दौड़ में वह अपनी सबसे बड़ी पूंजी खो चुका था।
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