#सैड स्टेटस
हिन्दी
कांच के टुकड़े
“
खुद को समेटने की हर कोशिश बेकार हुई,
हाथों में फिर से वही पुराने ज़ख्म आए।
जिसको चाहा था शिद्दत से अपनी रूह में,
वही शख्स आज हमें अजनबी नज़र आए।
हाथों में फिर से वही पुराने ज़ख्म आए।
जिसको चाहा था शिद्दत से अपनी रूह में,
वही शख्स आज हमें अजनबी नज़र आए।
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