किताबों से दुश्मनी
किताबें खोलते ही ऐसा नशा चढ़ता है, कि पलकें अपने आप भारी होकर सीधा सपनों की दुनिया में ले जाती हैं।
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हल्के मज़ाक, किसी की कीमत पर नहीं।