चांदनी रात का एहसास

चांदनी रात का एहसास

“
रात की इस खामोशी में तेरा नाम गुनगुनाता हूं, चांद को देखकर अक्सर तुझे गले लगाता हूं। फासले कितने भी क्यों न हों दरमियान हमारे, मैं हर सांस में सिर्फ तेरी खुशबू पाता हूं।
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तेरी चाहत का असर

जब से मिला है तेरी मोहब्बत का सुकून, हर लम्हा जिंदगी का हसीन होने लगा है। आँखों में बस गया है चेहरा तेरा इस कदर, कि खुद से भी ज्यादा तू मुकम्मल होने लगा है।

आंखों का पैगाम

तुम्हारी इन आंखों में कुछ ऐसा जादू है, बिना कुछ कहे दिल का हाल कह जाता हूं। नजरें जब मिलती हैं तुमसे ऐ सनम, मैं खुद को भूलकर सिर्फ तुम्हारा हो जाता हूं।

सफर-ए-मोहब्बत

हाथों में हाथ लेकर चलने का वादा किया था, हर मुश्किल रास्ते पर साथ रहने का इरादा किया था। आज भी तुम्हारी वो यादें मेरे साथ चलती हैं, जो हमने मिलकर एक खूबसूरत ख्वाब देखा था।

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नूर-ए-मोहब्बत

तेरी निगाहों का जादू कुछ ऐसा चल गया, कि इस बुझे हुए दीये में फिर से नूर आ गया। जमाना लाख रोके हमको इस राह चलने से, मगर यह दिल तो सिर्फ तुझ पर ही आ गया।

दिल की आरजू

तुझसे मिलकर यूं लगा जैसे सब कुछ पा लिया, इस वीरान सफर को जैसे कोई हमसफर मिल गया। अब तो बस यही ख्वाहिश है इस दिल की, कि तेरे संग ही गुजरे मेरा हर एक नया सवेरा।

ख्वाबों का सिलसिला

तेरी यादों के साये में रात कट जाती है, हर एक धड़कन बस तेरा नाम ही दोहराती है। खुदा से क्या मांगूं अब इस दिल के वास्ते, जब तेरी मौजूदगी से ही हर दुआ पूरी हो जाती है।