धीमी सी आहट

धीमी सी आहट

“
दरवाजे पर दस्तक किसी की जो हुई, लगा मेरा यार मुझे मिलने आया है। बरसों की जुदाई का दर्द पल में मिटा, देखो आज फिर से अपनापन लौट आया है।
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साए की तरह

हर मुश्किल मोड़ पर जो साथ निभाए, ऐसा यार खुदा हर किसी को दिलाए। धूप हो या छांव का सफर हो कोई, वो साए की तरह हमेशा पास आ जाए।

अक्सर खामोशियां

लफ्जों की जरूरत हमें कहां पड़ती है, हमारी तो खामोशियां भी आपस में बातें करती हैं। वक्त कोई भी हो इस दौर में, तेरी यारी पर आंखें बंद करके यकीन करती हैं।

साझा दुआएं

खुदा से क्या मांगू तेरे बिना, मेरी हर दुआ में तेरा ही नाम होता है। दुनिया रूठ जाए तो कोई गम नहीं, बस यार तेरा साथ मेरे लिए तमाम होता है।