बेफिक्र लम्हे

बेफिक्र लम्हे

“
चलो फिर से वही पुराना दौर लाते हैं, बैठकर यार सब मिलकर मुस्कुराते हैं। दुनिया की फिक्र को छोड़ो एक तरफ, आज फिर से बचपन की यादें दोहराते हैं।
👁️ 1 बार पढ़ा गया ❤️ लोगों ने पसंद किया

टिप्पणियाँ

अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।

लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।

संबंधित शायरी (Related Shayari)

साए की तरह

हर मुश्किल मोड़ पर जो साथ निभाए, ऐसा यार खुदा हर किसी को दिलाए। धूप हो या छांव का सफर हो कोई, वो साए की तरह हमेशा पास आ जाए।

अक्सर खामोशियां

लफ्जों की जरूरत हमें कहां पड़ती है, हमारी तो खामोशियां भी आपस में बातें करती हैं। वक्त कोई भी हो इस दौर में, तेरी यारी पर आंखें बंद करके यकीन करती हैं।

साझा दुआएं

खुदा से क्या मांगू तेरे बिना, मेरी हर दुआ में तेरा ही नाम होता है। दुनिया रूठ जाए तो कोई गम नहीं, बस यार तेरा साथ मेरे लिए तमाम होता है।