#एटिट्यूड शायरी
हिन्दी
मंजिल के मुसाफिर
“
रास्ते खुद ही बना लेते हैं वो लोग, जिन्हें भीड़ की परवाह नहीं होती।
झुकना हमारे खून में नहीं, हमारी तो परछाई भी सीधी होती है।
झुकना हमारे खून में नहीं, हमारी तो परछाई भी सीधी होती है।
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