बेपरवाह फितरत

बेपरवाह फितरत

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लोग क्या कहेंगे इस बात की परवाह हमने कभी की ही नहीं। अपनी धुन में जीना और जीतना ही हमारा मकसद है।
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अलग अंदाज

भीड़ का हिस्सा बनना हमारी फितरत नहीं, हम अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं। लोग जलते हैं हमारी कामयाबी से, क्योंकि हम हर बाजी अपने दम पर जीत जाते हैं।

बेखौफ इरादे

तूफानों से टकराने का हुनर रखते हैं, हम अपने दम पर आगे बढ़ने का जिगर रखते हैं। परछाइयों से डरना हमारी आदत नहीं, हम तो रोशनी बनकर जीने का दम रखते हैं।

अकड़ और शान

ताज की ख्वाइश किसे है यारो, हम तो अपने उसूलों के बादशाह हैं। झुकाना तो हमारी फितरत में ही नहीं, हम तो अपनी ही धुन में मस्त और आजाद हैं।

तेवर की आग

हम जलते हैं तो दुनिया रौशन होती है, हमारी राहों में हर मुश्किल बेदम होती है। लोग कहते हैं हमें गुरूर बहुत है, पर हमारी शख्सियत ही कुछ ऐसी खास होती है।