सूरज की तपीश
सूरज की गर्मी से किसी का वजूद नहीं मिटता,
हमारी शख्सियत से आज भी कितनों का दिल जलता है।
हम वो आग हैं जो बुझाने से और भड़कती है,
हमसे उलझना यानी अपनी बर्बादी लिखना है।
हमारी शख्सियत से आज भी कितनों का दिल जलता है।
हम वो आग हैं जो बुझाने से और भड़कती है,
हमसे उलझना यानी अपनी बर्बादी लिखना है।
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