कांच के टुकड़े
बिखरे हुए कांच को समेटने चले थे हम, हर एक टुकड़े पर तेरा ही नाम लिखा मिला। जख्मों की गिनती भूल गए इस सफर में, बस दर्द का हर एक लम्हा हमें अपना सा लगा।
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