सफलता का मुकाम

सफलता का मुकाम

“
मंजूर नहीं मुझे थककर बैठ जाना, अभी तो मुझे बहुत दूर तक है जाना। हर मुकाम को अपना बनाने की ख्वाहिश ही जीवन को अर्थ देती है।
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