अडिग कदम

अडिग कदम

“
गिरना भी अच्छा है, संभलना सीख जाओगे। ठोकरों के बाद ही चलना सीख जाओगे। रास्ते चाहे कितने भी हों दुर्गम बन्दे, तू कदम बढ़ा तो सही, रास्ता खुद पा जाओगे।
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