लक्ष್ಯ की ओर

लक्ष್ಯ की ओर

“
कदम बढ़ाते चलो राह खुद बन जाएगी, मेहनत की हर बूंद रंग लाएगी। तूफानों से डरना कैसा ऐ मुसाफिर, मंजिल एक दिन खुद चलकर पास आएगी।
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