धूप और छांव सा प्यार

धूप और छांव सा प्यार

“
धूप सी तेज है याद तेरी, और छांव सा तेरा साथ प्रिये, हर मुश्किल घड़ी में बस यही सोचकर मुस्कुरा देता हूं, कि मेरे हाथों में है तेरा हाथ प्रिये।
”

— राहत इन्दौरी

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मुस्कान की वजह

तुम्हारी एक मुस्कान मेरी पूरी दुनिया बदल देती है, उदास रातों को भी ये सुबह में ढाल देती है। खुदा से और क्या मांगूं मैं अपनी जिंदगी के लिए, जब तेरी मोहब्बत मुझे हर खुशी दे देती है।
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ख्वाबों का आशियाना

इन बंद पलकों में मैंने एक घर बनाया है, जहां सिर्फ तुम्हारा और मेरा साया समाया है। कोई चुरा न ले इस खूबसूरत तस्वीर को कभी, मैंने अपनी रूह में तुम्हें बसाया है।
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वक्त की लकीरें

वक्त बदलता गया और फासले बढ़ते गए, पर दिल के किसी कोने में हम आज भी वही ठहर गए। तुम्हारी हर बात आज भी याद है मुझे यूं, जैसे कल ही हम दोनों मिले थे कहीं।
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बारिश की बूंदें

बारिश की इन बूंदों में तुम्हारा ही अक्स नजर आता है, हर एक कतरा जैसे तुम्हारा ही नाम गुनगुनाता है। मौसम कोई भी हो मेरे यार, मेरा दिल सिर्फ तुम्हें ही बुलाता है।
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नूर-ए-मोहब्बत

तेरी निगाहों का जादू कुछ ऐसा चल गया, कि इस बुझे हुए दीये में फिर से नूर आ गया। जमाना लाख रोके हमको इस राह चलने से, मगर यह दिल तो सिर्फ तुझ पर ही आ गया।
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दिल की आरजू

तुझसे मिलकर यूं लगा जैसे सब कुछ पा लिया, इस वीरान सफर को जैसे कोई हमसफर मिल गया। अब तो बस यही ख्वाहिश है इस दिल की, कि तेरे संग ही गुजरे मेरा हर एक नया सवेरा।
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ख्वाबों का सिलसिला

तेरी यादों के साये में रात कट जाती है, हर एक धड़कन बस तेरा नाम ही दोहराती है। खुदा से क्या मांगूं अब इस दिल के वास्ते, जब तेरी मौजूदगी से ही हर दुआ पूरी हो जाती है।
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