खामोश इश्क

खामोश इश्क

“
कुछ बातें लबों तक आते-आते रुक जाती हैं, नजरें हमारी खुद ही सब कुछ कह जाती हैं। खामोशी का ये रिश्ता भी बहुत अजीब है, जो बिना आवाज के पूरी कायनात हिला जाती है।
”

— डॉ. कुमार विश्वास

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