#दोस्ती शायरी
हिन्दी
रंगों का मेला
“
फीकी पड़ रही थी जिंदगी की हर एक शाम, तूने आकर उसमें नए रंग भर दिए। दुनिया ने तो बस दर्द ही दिए थे हमको, तूने हंसाकर सारे गम हर लिए।
”
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