#दोस्ती शायरी
हिन्दी
अक्सर खामोशियां
“
लफ्जों की जरूरत हमें कहां पड़ती है, हमारी तो खामोशियां भी आपस में बातें करती हैं। वक्त कोई भी हो इस दौर में, तेरी यारी पर आंखें बंद करके यकीन करती हैं।
”
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