#दोस्ती शायरी
हिन्दी
बेफिक्र लम्हे
“
चलो फिर से वही पुराना दौर लाते हैं, बैठकर यार सब मिलकर मुस्कुराते हैं। दुनिया की फिक्र को छोड़ो एक तरफ, आज फिर से बचपन की यादें दोहराते हैं।
”
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