#भावनात्मक कहानी
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रेडियो की खड़खड़ाहट और पुराना संगीत
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पुरानी लकड़ी की अलमारी के पीछे छुपा हुआ वह ट्रांजिस्टर रेडियो सालों बाद आज अचानक मिल गया था। उसके एंटीना पर धूल की एक मोटी परत जमी थी और बैटरी का डिब्बा पूरी तरह जंग खा चुका था। जैसे ही मैंने उसे साफ करके चालू किया, एक जानी-पहचानी धुन कमरे में गूंज उठी। यह वही संगीत था जिसे सुनकर हम दोनों ने कभी भविष्य के सुनहरे सपने बुने थे। वक्त ने दूरियां बढ़ा दीं और रास्ते जुदा हो गए, लेकिन उस सुरीली आवाज ने अतीत के सारे पन्ने पलटा दिए। अब हवा में कोई शिकायत नहीं थी, बस एक मीठी सी खामोशी थी जो दिल को सुकून दे रही थी।
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