खास पहचान

खास पहचान

“
न नक़्शा चाहिए न किसी का सहारा, हम खुद अपनी तकदीर लिखते हैं। जो हमारी बराबरी करना चाहें, वो पहले अपना मुकाम ऊंचा करें।
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छाया और प्रकाश

सूरज की रोशनी से डरने वाले अंधेरे में छुपते हैं, हम तो वो उजाला हैं जो अंधेरे को भी चीर कर आगे निकल जाते हैं। हमारा अंदाज सबसे जुदा और सबसे पक्का है।

हमारी सल्तनत

ताज की ख्वाहिश किसे है, हम तो अपने उसूलों के बादशाह हैं। जहां कदम रख दें वहीं हमारी सल्तनत शुरू हो जाती है, किसी के आगे झुकना हमारी फितरत में नहीं।

सिक्कों की खनक

सिक्के आवाज करते हैं पर नोट हमेशा खामोश रहते हैं, इसलिए हमने भी शोर मचाना छोड़ दिया है। हमारी मौजूदगी ही विरोधियों के होश उड़ाने के लिए काफी है।