#दोस्ती शायरी
हिन्दी
ख्वाबों का कारवां
“
मिलकर जो देखे थे कभी वो ख्वाब सजाएंगे, आंधियां कितनी भी आएं हम हाथ न छुड़ाएंगे।
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