खामोशियाँ और बातें
जब अपनों से बातें कम और दूरियाँ बढ़ने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि दिल से दिल का राब्ता कम हो रहा है।
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रिश्तों की साफ़ और कोमल बातें।