सवेरे की उम्मीद

सवेरे की उम्मीद

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रात चाहे कितनी भी घनी क्यों न हो, सुबह का सूरज उसे हरा ही देता है। उम्मीद का दामन कभी मत छोड़ना दोस्त, एक नया सवेरा हर गम को मिटा ही देता है।
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