अंधेरे से उजाला

अंधेरे से उजाला

“
रात जितनी भी गहरी हो सुबह जरूर आती है, हर निराशा के पीछे नई आस समाती है। सूरज की एक किरण भी काफी है यहाँ, बुझी हुई उम्मीदों में जान जगा जाती है।
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