मंजिल की खोज

मंजिल की खोज

“
कदमों की रफ्तार पर भरोसा रखो, आंधियां कितनी भी तेज हों, हौसले बुलंद हों तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं।
👁️ 1 बार पढ़ा गया ❤️ लोगों ने पसंद किया

टिप्पणियाँ

अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।

लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।

संबंधित शायरी (Related Shayari)