#दोस्ती शायरी
हिन्दी
दिल की गहराइयां
“
लफ्जों की जरूरत उसे कहां पड़ती है, हमारी खामोशी भी जो शख्स पढ़ लेती है। खुदा ने बख्शी है हमें एक ऐसी दौलत, जो हर मुसीबत में हमारे आगे खड़ी रहती है।
”
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