बिन बोले की बात

बिन बोले की बात

“
लफ्जों की जरूरत किसे है यहां, तेरी खामोशी भी हम पढ़ लेते हैं। दुनिया लाख रूठे हमसे क्या फर्क पड़ता है, हम तो बस तुम्हारी यारी में जी लेते हैं।
”
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