कठिनाइयों की रातें चाहे जितनी लंबी हों, मेहनत का सूरज उगकर ही रहता है। हर ठोकर एक नया सबक देती है, जो तुम्हें तुम्हारी मंजिल के और करीब ले जाती है।
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सूरज की हर किरण हमें यह याद दिलाती है कि अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, उजाला उसे चीरकर बाहर आ ही जाता है। आज ही एक नया संकल्प लें।
अगर चमकना है सूरज की तरह आसमान में, तो पहले जलना होगा इस तपती हुई धूप की शान में।
रात चाहे जितनी भी लंबी हो, सुबह का सूरज अपनी रोशनी बिखेर ही देता है।
रात कितनी भी गहरी क्यों न हो, सुबह का सूरज अपनी रोशनी बिखेरने जरूर आता है। निराशा के बाद आशा का सवेरा तय है।
अंधेरों से डरकर जो रुक जाते हैं, वो कभी सूरज की चमक नहीं देख पाते। तूफानों के सीने पर जो पाँव रखते हैं, इतिहास वही वीर लोग रचाते हैं।
सूरज की तरह चमकना है अगर, तो पहले तपना ही पड़ेगा। अंधेरों से जंग जीत कर ही, अपना नया मुकाम गढ़ना पड़ेगा।
रात जितनी भी गहरी हो सुबह जरूर आती है, हर निराशा के पीछे नई आस समाती है। सूरज की एक किरण भी काफी है यहाँ, बुझी हुई उम्मीदों में जान जगा जाती है।
रात कितनी भी गहरी हो सूरज को उगना ही है, तुम्हारी मेहनत का फल भी तुम्हें एक दिन मिलना ही है।