#बेवफा शायरी
हिन्दी
अशोक की छांव
“
तेरी महफिल में हमारी कोई औकात न थी, हम तो बस बेवफाओं की बस्ती के मेहमान थे।
”
👁️ 1 बार पढ़ा गया
❤️ लोगों ने पसंद किया
पाठकों की टिप्पणियाँ (Comments)
अभी कोई टिप्पणी प्रकाशित नहीं हुई है। पहले पाठक बनकर अपनी राय दें!
टिप्पणी करने के लिए लॉग इन करें।