जिसने पसीने से अपना मुकद्दर लिखा है, दुनिया उसी के आगे झुकती है। संघर्ष के बिना कोई चमक नहीं आती, सोने को भी तपना पड़ता है।
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दूसरों की रोशनी से कब तक चमकोगे? खुद दीया बनो और अपने हिस्से का अंधकार मिटाओ। तुम्हारी अपनी पहचान ही तुम्हारी सबसे बड़ी पूंजी है।
आज जो पसीना बहाओगे तुम इस मैदान में, कल वही हीरा बनकर चमकेगा आसमान में।
अगर चमकना है सूरज की तरह आसमान में, तो पहले जलना होगा इस तपती हुई धूप की शान में।
सफलता के रास्ते पर भीड़ कम मिलेगी, क्योंकि चमकने वाले हीरे को, अंधेरे में ही तराशा जाता है।
अंधेरों से डरकर जो रुक जाते हैं, वो कभी सूरज की चमक नहीं देख पाते। तूफानों के सीने पर जो पाँव रखते हैं, इतिहास वही वीर लोग रचाते हैं।
हीरा जितना अधिक तराशा जाता है, उसकी चमक उतनी ही बढ़ती है। इंसान भी संघर्ष से ही चमकता है।
सूरज की तरह चमकना है अगर, तो पहले तपना ही पड़ेगा। अंधेरों से जंग जीत कर ही, अपना नया मुकाम गढ़ना पड़ेगा।